
अरहान की पहली किताब
इतवार का एक दिन
कहानियों का एक संग्रह — प्रेम, अवसाद, स्मृति, अकेलापन और फैंटेसी के बीच लिखा गया।
“कभी-कभी कहानियाँ आपके भीतर ही दबी रहती हैं — तब तक, जब तक अवसाद उन्हें बाहर खींच न ले।”
बृजेश कुमार सिंह, जो अरहान नाम से लिखते हैं, की यह पहली किताब उन स्याह शामों, अधूरी बातों और खोए हुए किरदारों की किताब है जिन्हें हम अक्सर अपनी यादों की दराज में छिपा देते हैं।
यह किताब किस बारे में है?
‘इतवार का एक दिन’ केवल एक कहानी संग्रह नहीं है। यह एक लेखक की आत्मा से रिसती हुई उन शामों की झलक है, जहाँ प्रेम अपनी सरलता खो चुका है, स्मृतियाँ दराजों में बंद हैं, और कुछ किरदार अब भी अपने लेखक का इंतज़ार कर रहे हैं।
इस संग्रह में आप मिलेंगे — उस आदमी से, जो अपनी पत्नी को प्रेमी के साथ शादी करने देता है; उस लड़की से, जिसकी लाश अब भी इंतज़ार कर रही है कि कोई उसकी मौत की सच्चाई लिखे; उन गुम बिल्ली के बच्चों से, जिनकी तलाश शायद किसी मुराकामी की गलियों में होती है; और उस लेखक से, जो हर बार टूटकर भी अपने किरदारों को नया जीवन देना चाहता है।
अगर आपको ऐसी कहानियाँ पसंद हैं…
- जो सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, भीतर तक असर छोड़ती हैं
- जिनमें प्रेम, पछतावा और अकेलापन साथ-साथ चलते हैं
- जहाँ यथार्थ के बीच अचानक फैंटेसी की हल्की परछाइयाँ आ जाती हैं
- जहाँ किरदार देसी हैं, लेकिन उनका दर्द सार्वभौमिक है
…तो यह किताब आपके लिए है।
पाठकों ने क्या कहा
बेआवाज़ भावनाओं की गूंज
बहुत ही प्यारी किताब!
बहुत ही खूबसूरत किताब
Amazing title, amazing story
Amazon पर किताब को 4.2/5 और Flipkart पर 4.4 rating मिली है।
किताब कहाँ से खरीदें?
अगर आप हिंदी कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं, खासकर ऐसी कहानियाँ जो प्रेम, अकेलेपन, अवसाद, स्मृति और हल्की फैंटेसी के बीच चलती हैं, तो यह किताब आपके लिए है।
लेखक के बारे में
बृजेश कुमार सिंह ‘अरहान’ नाम से लिखते हैं। उनकी कहानियों और कविताओं में प्रेम, स्मृति, उदासी, अधूरेपन और जादुई यथार्थ की हल्की परछाइयाँ मिलती हैं। ‘इतवार का एक दिन’ उनकी पहली प्रकाशित किताब है।
किताब खरीदें
‘इतवार का एक दिन’ अभी उपलब्ध है आनलाइन और ऑफलाइन — अपना पसंदीदा प्लेटफ़ॉर्म चुनें।