टैग: कविता
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उन दिनों
उन दिनों कुत्ते ज्यादा भौंकते थे रातों मेंप्यार के लिए *शहर के दुकानदार बेच रहे थे 100 रुपये में दो चादर *चोर उन दिनों माँओं को बताते थे पुलिस की नौकरी के बारे में *मैट्रिक इंटर के लड़के छतों पर बिना सीढ़ी के चढ़ते हुए गिरा करते थे *मेडिकल के दुकानों में गर्भनिरोधक गोलियां धड़ल्ले…
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बोरवेल में सच का गिरना
दुनिया कह रही थी“बोरवेल में बच्चा गिरा है”दुनिया अपने हाथ कमीज में छिपा कर कह रही थी“हमारे हाथ कटे है”दुनिया चिल्ला चिल्ला कर उस से कह रही थी“उतरो नीचे, तुम्हारे पास कमीज नहीं”“तुम्हारे हाथ दीखते हैं”वो दुनिया से नही डरता थादुनिया की परवाह नही थी पर बच्चे के बारे में सोच कर उतराउसे सच्चाई पसंद…
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भूख
टिन के फूटे कनस्तर में थोड़ा सा आटा है पेट में बरसो पुरानी भूख है एक लड़की चुराती है आटाएक लड़का चुराता है भूखटिन के उस फूटे कनस्तर में अब भी थोडा सा आटा है पेट की भूख ने बस ख़ुदकुशी कर ली है
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मैं झूठा हूँ, और खुश हूँ
मैं खुश नहीं हूँ वजहें काफी हो सकती है खुश रहने की एक बूढी हो चुकी किताब पे जिल्द लगाने से मुझे मिलनी चाहिए ख़ुशी पर इस किताब के फटते पन्नों को देख दुःख नही होताशायद मैंने पतंगे बहुत काटी है पतंगों की डोर से पतंगे बनायीं भी बहुत हैकिताबे फाड़ के खुश रहने के…
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तुम
तुम होकिसी प्राचीन कालीन शिला पेकिसी अजीब भाषा में लिखे अभिलेख की तरहजिसे मैं किसी पुरातत्त्ववेत्ता की तरहसमझने की कोशिश करता हूँ पर समझ नहीं पाता मैं तुम्हे मैं रख देना चाहता हूँअपने ह्रदय के संग्रहालय मेंहमेशा के लिए संभालकरइस उम्मीद के साथ कीदिल की धड़कने बंद होने से पहलेमैं समझ जाउंगा तुम्हे
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आईना
तुम्हारा दायीं तरफ एक बड़ा आईना है तुम्हारे बायीं तरफ भी उतना ही बड़ा आईना है मान लो तुम्हारे दायीं तरफ के आईने को मैं जिंदगी कहता हूँ और बायीं तरफ के आईने को मौत अब जरा करीब से देखो दोनों आईने में बारी बारी तुम कितनी दफा मरते होकितनी दफा जीते होजिंदगी नामक आईने में है मौतमौत नामक आईने…
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परिया
रात के दो बजे आवारा लड़का बैठा है छत की मुंडेर पररोज की तरह फिर से घर छोड़ देने की धमकी देकरभूखे प्यासे आसमान को ताकते हुएलड़का आसमान को ताककरअपने मोबाइल पर गूगल करता है fairies जानना चाहता है की कैसी दिखती है परियांलड़के के 2G मोबाइल पर गूगल सर्च कम्पलीट होने से पहलेबाजू वाले छत…
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कविता
जो तुम्हारे काजल से घुलकर बन गयी स्याहीऔर लिखने लगी विरह की एक अंतहीन कविता मैंने यूँ तो चूमा है कई दफा तुम्हारे चेहरे कोपर अफ़सोस उस दिन न छु सके मेरे होठ तुम्हारे आँखों कोअगर उस दिन मैं तुम्हे चूमता तोशायद मिटा देता अपने होठो से वो विरह की कवितालिख देता तुम्हारे चेहरे पर…
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ऐ चाँद सुन जरा
ओ बीती हुई रातो के बासी चाँदज़रा झाँक के देख जमीन पेक्या उस पागल लड़की ने फिर से जला लिए है अपने हाथतारे गिनते हुएया फिर से किसी टूटते तारे ने, तोड़ा है उसकी बंद आँखों में सजता कोई सपनाया फिर से कोई मतवाली हवाउड़ा ले गयी है उसके सारे प्रेम पत्रऔर वो ढूंढ रही है…
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बेसुध रातों के आवारा नोट्स
यहाँ हंसने के लिए बस अपना चेहरा था और सबके माथे पर चिपका था आईना रात जब भी खांसते हुए, छाती पे जाते है हाथ हथेलिय महसूस करती है पुराने जख्मो के निशान शराब में डूबा मन, डायरी में लिख देता है की पिछली जन्म में मैंने किया था प्यार या फिरमेरी यादाश्त बहुत कमजोर हैयाद नहीं हो पाते पांच फोन…