
मेरा नाम ब्रजेश कुमार सिंह है। लिखता हूँ अरहान नाम से।
अरहान नाम एक थाई फ़िल्म से लिया था जो बचपन में देखी थी। उसमें villain का नाम था अरहान — और वो नाम ज़ेहन में चिपक गया। राइटर बनने का ख़्वाब था, तो एक दिन यही नाम अपना रख लिया।
2025 में मेरी पहली किताब आई — इतवार का एक दिन। कहानियों का एक संग्रह जो प्रेम, अवसाद, स्मृति, अकेलेपन और फ़ैंटेसी के बीच लिखा गया। किताब Amazon और Flipkart पर उपलब्ध है।
लिखने-पढ़ने का शौक़ शुरू से रहा है। हरुकी मुराकामी और गौरव सोलंकी सबसे पसंदीदा लेखक हैं। जापानी, लैटिन अमेरिकी, रूसी और हिंदी साहित्य — सब पढ़ता हूँ। फ़िल्मों का भी उतना ही शौक़ है — इम्तियाज़ अली, अनुराग कश्यप, क्रिस्टोफ़र नोलन पसंदीदा निर्देशक हैं।
दिल्ली में बहरी सन्स की किताबों की दुकान और उनका Blue Tokai कैफ़े — यही मेरी लिखने की जगह है।
इस ब्लॉग पर कहानियाँ हैं, फ़िल्म समीक्षाएँ हैं, किताबों के बारे में बातें हैं — और कभी-कभी वो शब्द हैं जो कहीं और नहीं जाते।
यहाँ सपने लिखे जाते हैं।
