“का जी, आजकल बहुत देख रहें हैं तुमको, उसके आगे पीछे करते हुए”
सामने से आते हुए पांच छ लड़कों में से सबसे हट्टे कटते लड़के ने, हीरो साइकिल पर सवार मासूम से दिख्न्ने वाले लड़के को रोकते हुए पुछा।

लड़का इस अप्रत्याशित पूछताछ से थोडा चौंका और घबराते हुए पूछा “किसके आगे पीछे, माफ़ कीजियेगा हम कुछ समझे नहीं”

“बेटा, जादा अनजान ना बनो, और ई जो आशिकी का क्रेश कोर्स कर रहे हो ना छोड़ दो, नहीं तो ऐसन हाल करेंगे की चेहरा का जियोग्राफी बिगड़ जाएगा, बुझे की नहीं, मम्मी लगेगी तुम्हारी समझे, उस से दूर ही रहो”

अब लड़का सब कुछ समझ चूका था, और उसे मालूम चल चूका था की ये लड़के कौन है और किस के बारे में बात कर रहे हैं फिर भी उसने अनजान बनते हुए कहा की “देखिये आपको जो करना है कीजिये पर मुझे परेशां मत कीजिये, मैं पहले ही कोचिंग के लिए लेट हो रहा हूँ”

“ठीक है बेटा जहाँ जाना है जाओ पर जो बतवा कहें हैं उसपे ध्यान दो, नहीं त कौना गल्ली आ नुक्कड़ से गायब हो जाओगे, पता भी नहीं चलेगा”

छोटे शहरों में प्रेम करना, प्रेम करते हुए, अपनी हड्डी पसलियाँ सलामत रखना और साथ में अछे नंबरों से पास होना बहुत ही मुश्किल कॉम्बिनेशन है. अगर आप किसी से प्रेम करते हैं और सीधे साधे पढने लिखने वाले लडको के श्रेणी में आते हैं तो ये निर्धारित है की किसी ना किसी रोज, किसी नुक्कड़ या चौराहे पर आपकी प्रेमिका के कथित एकतरफा प्रेमियों से आपकी पिटाई होंने वाली है. ये लड़का भी उसी श्रेणी में आता था.शहर के एक बड़े स्कूल में पढने वाले इस बारहवीं क्लास के लड़के को अंदाजा नहीं था की उसके साथ आज कुछ ऐसा होगा। लडका एक होनहार विद्यार्थी था, स्कूल, कोचिन्ग से लेकर मोहल्ले तक उसके पढ़ाकू होने के चर्चे थे. लड़का अपने पौकेट में आई आई टी नाम का सपना रखता था और इसी सपने को सच करने के लिए दिन भर किताबों से घिरा रहता था. उसके दिनचर्या का तारा, पढाई नामक आकाशगंगा के इर्द गिर्द के ही चक्क्कर काटता, इस से बाहर कि दुनिया ना उसने देखी थी ना ही देखना चाहता था, क्यूंकि रोज उसके स्टडी टेबल पर Bournvita और बादाम रख जाने वाली उसकी माँ का सपना भी उसके सपने से जुड़ा था, सरकारी शिक्षक का एक मामूली सा वेतन उठाने वाले उसके पिता का भी यही सपना था की उसके बेटे का नाम से पहले इंजिनियर शबद लगे. और उन दोनों को पूरा यकीन था की उनका होनहार बेटा एक दिन राहुल दुबे से इंजीनियर राहुल दुबे जरुर बनेगा. पर अक्सर ये जरुरी नहीं होता की सीधी लगने वाली सड़क दूर तख सीधी ही हो, कभी कभी सड़क आगे जा कर घूम जाती है या फिर सड़क से निकल कर एक कच्चा रास्ता दुसरेदिशा में चला जाता है. लड़के को भी पता नहीं था कब प से पढ़ाई करते करते उसे प से प्यार हो जायेगा. उसे पता नहीं था की फिजिक्स का नोट्स लेते देते वो क्लास की उस सबसे खुबसूरत लड़की को अपना दिल दे बैठेगा. ऊपर वाला भी सबकी कहानी एक ही रंग के स्याही से नहीं लिखता, वो भी स्याही बदलता है और उसके इस स्याही बदलने से बन्दे के किस्मत में फर्क आता है. और ठीक ऐसा हुआ राहुल दुबे के साथ. जीवन के सत्रह बसंत पार करते करते प्रेम नामक मर्ज के मरीज बन गए.


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