अगले १० मिनट के अंदर मैं मारा जाऊंगा
एक ट्रेन आएगी और रौंद जायेगी मुझे
खत्म कर देगी मेरी कहानी
मुझे पता है कुछ आँखों से आंसूं बहेंगे मेरे जाने के बाद
उतर जायेगा कुछ लोगो के चेहरे का रंग मेरी मौत की खबर सुनकर
लग जायेगी एक भीड़ मेरे घर के अहाते में
उसी अहाते में जहां से मैं रोज उसे देखा करता हूँ/था
वो आज पहली बार मेरे घर आएगी मेरे जनाजे में
शायदा आंसू भी बहा दे
और कोसे मुझे की क्यूँ में चला गया उसे छोड़कर
बिना बताये और बिना जताए की मैं उस से प्यार करता था
मेरे मरने के बाद टांगी जायेगी मेरी तस्वीर मेरे ड्राइंग रूम में
और आस पास बैंठे होंगे मेरे जान पहचान के लोग
और शायद वो लोग भी जिन्हें मैं जानता नहीं
ढांढस बाँध रहेंगे मेरे घरवालो का
हवाओ में तैर रहे होंगे वो बाते जो अक्सर किसी के मरने/आत्महत्या करने के बाद की जाती है
“अच्छा लड़का था, पता नहीं कैसे…”
“अभी तो उसने ठीक से दुनिया भी….”
“लड़की का चक्कर रहा होगा….”
आज का दिन पहला ऐसा दिन होगा
जब सब की जुबान पर मेरा नाम होगा
सबके जेहन में होगी सिर्फ मेरी ही बाते अच्छी या बुरी
अगर मैं वहाँ मौजूद होता तो बहुत अच्छा लगता
अपनी लोकप्रियता देखकर
मेरे मरने के एक दिन बाद
थोड़ी खत्म हो जायेगी मेरी लोकप्रियता
छंट चुकी होगी भीड़ मेरे घर से
लोग जा चुके होंगे मेरे घर से
हाँ ये अलग बात है की मैं अगले दो दिन के लिए बना रहूँगा लोगो के बीच चर्चा का विषय
मेरे घर में अब तक ढूंढ रहे होंगे लोग मेरा सुसाईड नोट
पर कुछ ना मिला होगा उनको
और बस इसी बात से मेरी माँ को तसल्ली होगी की मैंने आत्महत्या नहीं की
पर वो गलत होगी
अभी तक किसी को यकीन ना हुआ होगा मेरी बुज्दीली पर
और ना ही किसी को मिली होगी वजह मेरे मौत की
अगले एक महीने तक यूँ ही चलती रहेगी जिंदगी
और फिर धीरे धीरे भुला दिया जाऊंगा मैं
मेरी वजूद सिमट जायेगा एक एल्बम के तीसरे पन्ने तक
एक तस्वीर तक जो फूलो और अगरबत्तियो के बीच घिरा होगा कहीं किसी कमरे
सिमट के रह जायेगी मेरी यादें कुछ खास लोगो के जेहन तक
और धीरे धीरे जलती सिगरेट की तरह
गायब होने लगेगा मेरा आस्तित्व इस दुनिया से
रह जायेगी कुछ यादे
सिगरेट के बटकी तरह
मेरे चाहने वालो के हाथ में
एक ट्रेन आएगी और रौंद जायेगी मुझे
खत्म कर देगी मेरी कहानी
मुझे पता है कुछ आँखों से आंसूं बहेंगे मेरे जाने के बाद
उतर जायेगा कुछ लोगो के चेहरे का रंग मेरी मौत की खबर सुनकर
लग जायेगी एक भीड़ मेरे घर के अहाते में
उसी अहाते में जहां से मैं रोज उसे देखा करता हूँ/था
वो आज पहली बार मेरे घर आएगी मेरे जनाजे में
शायदा आंसू भी बहा दे
और कोसे मुझे की क्यूँ में चला गया उसे छोड़कर
बिना बताये और बिना जताए की मैं उस से प्यार करता था
मेरे मरने के बाद टांगी जायेगी मेरी तस्वीर मेरे ड्राइंग रूम में
और आस पास बैंठे होंगे मेरे जान पहचान के लोग
और शायद वो लोग भी जिन्हें मैं जानता नहीं
ढांढस बाँध रहेंगे मेरे घरवालो का
हवाओ में तैर रहे होंगे वो बाते जो अक्सर किसी के मरने/आत्महत्या करने के बाद की जाती है
“अच्छा लड़का था, पता नहीं कैसे…”
“अभी तो उसने ठीक से दुनिया भी….”
“लड़की का चक्कर रहा होगा….”
आज का दिन पहला ऐसा दिन होगा
जब सब की जुबान पर मेरा नाम होगा
सबके जेहन में होगी सिर्फ मेरी ही बाते अच्छी या बुरी
अगर मैं वहाँ मौजूद होता तो बहुत अच्छा लगता
अपनी लोकप्रियता देखकर
मेरे मरने के एक दिन बाद
थोड़ी खत्म हो जायेगी मेरी लोकप्रियता
छंट चुकी होगी भीड़ मेरे घर से
लोग जा चुके होंगे मेरे घर से
हाँ ये अलग बात है की मैं अगले दो दिन के लिए बना रहूँगा लोगो के बीच चर्चा का विषय
मेरे घर में अब तक ढूंढ रहे होंगे लोग मेरा सुसाईड नोट
पर कुछ ना मिला होगा उनको
और बस इसी बात से मेरी माँ को तसल्ली होगी की मैंने आत्महत्या नहीं की
पर वो गलत होगी
अभी तक किसी को यकीन ना हुआ होगा मेरी बुज्दीली पर
और ना ही किसी को मिली होगी वजह मेरे मौत की
अगले एक महीने तक यूँ ही चलती रहेगी जिंदगी
और फिर धीरे धीरे भुला दिया जाऊंगा मैं
मेरी वजूद सिमट जायेगा एक एल्बम के तीसरे पन्ने तक
एक तस्वीर तक जो फूलो और अगरबत्तियो के बीच घिरा होगा कहीं किसी कमरे
सिमट के रह जायेगी मेरी यादें कुछ खास लोगो के जेहन तक
और धीरे धीरे जलती सिगरेट की तरह
गायब होने लगेगा मेरा आस्तित्व इस दुनिया से
रह जायेगी कुछ यादे
सिगरेट के बटकी तरह
मेरे चाहने वालो के हाथ में
अराहान
29.07.2012
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