बेसुध रातों के आवारा नोट्स

यहाँ हंसने के लिए बस अपना चेहरा था 
और सबके माथे पर चिपका था आईना 

रात जब भी खांसते हुए, छाती पे जाते है हाथ 
हथेलिय महसूस करती है पुराने जख्मो के निशान 
शराब में डूबा मन, 
डायरी में लिख देता है की 
पिछली जन्म में मैंने किया था प्यार 
या फिर
मेरी यादाश्त बहुत कमजोर है
याद नहीं हो पाते पांच फोन नंबर
की हर नंबर डायल करने के बाद
प्यार में पागल किसी लड़की का प्रेत कहता है
“डायल किया गया नंबर मौजूद नहीं”

तकिये के नीचे शायद अब उतनी जगह बची नहीं
की दो लोग कर ले आराम बाहों में बाहें डाल कर
रो सके, हंस सके या गा सकें कोई फ़िल्मी गीत
इसलिए पहले जहाँ होते थे
पागल लड़कियों के गुलाबी ख़त
अब वहा नींद की गोलियां बना चुकी है अपनी सरकार

एक दिन गूंगा रहने में क्या जाता है
की जो लड़कियां रुमाल पर कढ़ाई कर के लिखती थी मेरा नाम
अब वो खरगोशों की मौत पर आंसू नहीं बहाती
अब वो नोच लेती है उन खरगोशो के चमड़े से रुई
और कानों में खोसकर बहरी हो जाती हैं

रात चाँद आसमान में उल्टा टंगा दिखाई देता है
वो पागल लड़की फिर से पहने घूम रही है झुमके उलटे कर के
अब उस पागल लड़की को रोना चाहिए
की अब इस से ज्यादा बंजर नही होना चाहिए किसी लड़के का दिल
अब इस तरह सूखने नहीं चाहिए फसले मोहब्बत की
अब इतनी बारिश तो होनी चाहिए की
लबालब भरा रहे किसी शराबी का ग्लास
और वो यूँ ही नशे में पागल होके
लिखता रहे कवितायेँ 

Leave a Reply

Discover more from अरहान Arahaan

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading