धूल

मुझे पहले नहीं पता था की मरने के बाद लोग कहाँ जाते हैं. मुझे पहले लगता था की लोग या तो स्वर्ग जाते होंगे या नरक जाते होंगे या फिर कुछ लोग यहीं धरती पर ही रह जाते होंगे. मुझे इस सवाल का जवाब तब मिला जब आखिर में मुझे मृत्यु ने चूम लिया. मैं ऐसे अमूमन कई दफा अपनी बाइक से गिरता हूँ पर उस दिन जब मैं रात के बारह बजे शीतल के घर जा रहा था तो अचानक से सामने एक कार आ गयी और मैं कार से बचने के चक्कर में बाइक से गिर गया और मर गया.

वैसे मैं इस से पहले की आगे की बात बताऊँ, मैं आपलोग को बताना चाहूँगा की मैं शीतल से इसलिए मिलने जा रहा था क्यूंकि शीतल मेरी गर्लफ्रेंड थी. उस से मेरा दो महीने पहले ब्रेक अप हो चुका था. मैं शीतल को बहुत पहले मना लेना चाहता था पर मैं अपने होश वाली जिंदगी में बहुत नीरस आदमी हूँ. मुझे कभी नहीं लगा की मुझे शीतल से ब्रेकअप के बाद बात भी करनी चाहिए. पर उस दिन मेरे ड्राईवर ने ये कहकर की उसका जन्मदिन है थोड़ी सी शराब पिला दी. शराब पीने के बाद मुझे अहसास हुआ की शीतल से ज्यादा मुझे कोई भी लड़की प्यार नहीं कर सकती. इसलिए मैं अपने ड्राईवर की बाइक लेकर शीतल से मिलने जा रहा था.

हाँ, ये सच है की कभी कभी शीतल मुझसे बहुत ही बुरा व्यवहार करती थी पर मुझे लगता है की बस शीतल ही मुझे प्यार करती है. शीतल वैसे बहुत गोरी और सुन्दर है. बहुत लड़के उसके दीवाने हैं. मेरा एक दोस्त खुद शीतल का दीवाना है. लेकिन शीतल ने सिर्फ मुझे पसंद किया है. इसलिए नहीं की मैं एक बड़ी कंपनी में मैनेजर हूँ. इसलिए की शीतल मेरे अन्दर के इंसान को पहचानती है. अगर शीतल मेरी अच्छाई को नहीं देखती तो वो मेरे दोस्त अमर की प्रेमिका होती. अमर तो उसके बचपन का दोस्त भी है. दोनों एकदुसरे को जानते भी हैं लेकिन अमर एक नंबर का कामचोर है.वो मेहनत नहीं करता. वो हमारे क्लास में साथ पढता था लेकिन वो कभी खुद को इस काबिल नहीं बना सका की उसको कोई भी नौकरी मिल सके. वो अब भी अपने मोहल्ले में इधर उधर रंगदारी कर के अपना गुजारा करता है. शायद इसलिए शीतल उसको पसंद नहीं करती.

खैर मुझे जो बातें कहनी थी वो मैं कह चुका. मैं बस ये बताना चाहता हूँ की हर कोई मरने के बाद स्वर्ग में या नरकं में नहीं जाता या फिर वो कोई प्रेत बनके धरती पर ही नहीं भटकता. मरने के बाद लोगों को कई और तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाता है. अब मुझे ही ले लीजिये. मरने के कुछ ही देर बाद मुझे कुछ आदमियों ने कहा की तुम्हें सेक्शन 4 में जाना हैं. मैं सेक्शन 4 का पता पूछते-पूछते वहां पहुँच भी गया. वहां मुझे दो अजीब शक्ल वाले आदमियों ने एक श्रेडर में डाल दिया. मैं जब उस श्रेडर से बाहर निकला तब एक धूल की परत बन चूका था. हालाँकि तब भी मुझे इतना होश था की मैं ये सुन सकूँ की मुझे श्रेडर में डालने वाले लोगों ने आपस में क्या बात की

“अरे इसे कहीं धूल बनाकर ट्रान्सफर कर दो, ऐसे भी ये कोई उतना सही आदमी नहीं है. इसकी बीवी इस से बहुत प्यार करती थी. पर इस साले को कोई और पसंद थी. इस साले ने किसी और लड़की की खातिर अपनी बीवी को शादी के ही दिन मार दिया था. उसके बाद वो उसी लड़की से सच्चा प्यार करने लगा. होना क्या था वो लड़की भी किसी और से प्यार करती थी. जबतक उस लड़की को इस लड़के को आजमाना था उसने आजमाया. फिर छोड़ दिया. ये साला उस से नशे में मिलने ही जा रहा था की उसी लड़की के यार के कार से टक्कर खा के मर गया.”

कल दिवाली है. शीतल और अमर अपने घर की सफाई कर रहें हैं. शीतल के हाथ में एक कपडे का टुकडा है और वो एक सीढ़ी वाले स्टूल पर खड़ी है. नीचे अमर ने इस सीढ़ी वाले स्टूल को पकड़ के रखा है. अमर बार बार शीतल को गिराने की कोशिश कर रहा है पर गिरा नहीं रहा. शीतल अमर की इस शरारत को महसूस करके खूब इतरा रही है और मुस्कुरा रही है. शीतल अब अपने हाथ में पड़े कपडे से पंखें के ऊपर की जमी धुल को साफ़ कर रही है. ये कोई आम धुल नहीं है. ये मैं ही हूँ. मरने के बाद मुझे नरक और स्वर्ग में जगह नही मिली तो बस मुझे धूल बना दिया गया.

2 responses to “धूल”

  1. हर बार आप कुछ ऐसा लिख देतें है कि मन में एक ऐसी अनुभूति उत्पन्न होने लगती है जिसका एहसास कभी किया ही नही गया एक ऐसी विचारधारा जो एक दम नयी।

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