मास्टरपीस मैं चित्रकार नहीं हूँ. तुम्हारा चित्र नहीं बना सकता. उस समय भी नहीं जब तुमने पहली बार मेरे सामने कुर्सी पर आँखें मूंदकर शान्ति से अपने गीले बालों को सुखा रही थी. ऐसा लग रहा था कि जैसे दुनिया की सबसे खूबसूरत कविता को लिखने वाली स्याही की बूदें जुगनुओं की तरह दुनिया के सबसे खूबसूरत चेहरे के इर्द गिर्द भटके उपग्रहों की तरह घूम रही हों. मेरी आँखें काँप सी गयी थी. मुझे उस दिन पहली बार खुद का एक चित्रकार न होना आत्महत्या कर लेने जैसा दुखद लगा था. मैं शायद खुद को मार भी लेता लेकिन तुम्हारे बालों से आ रही उस खुशबू ने मुझे काठ का बना दिया था. मैं थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ लेकिन मैं उस खुशबू को शब्दों में नहीं ढाल सकता. ऐसा लग रहा था पहली बारिश से नहाई मिट्टी ने रातरानी के फूलों को चूम लिया हो. मुझमें अगर कुछ हरकत होने की गुंजाइश होती तो शायद मैं उठकर उस खुशबू को एक छोटी सी शीशी में बंद कर लेता और रातों को तारे गिनते समय अपनी अँगुलियों में लगा लेता.
यह ऐसा पहली बार ही हुआ था की मैंने इस तरह तुम्हारे गीले खुले बालों को देख रहा था. लेकिन न जाने क्यूँ मुझे ऐसा लग रहा था की शायद मैंने तुम्हे इस तरह पहले भी देखा है. शायद 20-30 साल पहले. शायद मैं कोई मजदूर था . शायद मैं किसी इमारत के तीसरी मंजिल पर रस्सी के सहारे लटककर वेल्डिंग का काम रहा था. वेल्डिंग मशीन की चिंगारियों की चकाचौंध से झुलसी मेरी आँखों जब तुम्हे सामने वाली घर के कमरे में कुर्सी पर यूँ बाल सुखाते देखा था तो शायद मेरे हाथ से वो मशीन छुट गयी थी. मेरी झुलसी आँखों को तुम्हारे काले और जादुई धागों जैसे बालों को देखकर एक अजीब सी ठंडक मिली थी. मैंने शायद उस दिन यह कसम खायी होगी की मैं तुम्हारे चेहरे की शांति तुम्हारे बालों के तिलिस्म को शब्दों में लिखने के लिए एक न एक दिन एक लेखक जरुर बनूँगा. मैं शायद कुछ भी भूल जाऊं पर तुम्हारा यह चेहरा न भूलूँ. इतना कहकर मैं शायद उस इमारत से गिरकर मर गया होऊंगा.
मैं अब थोड़ा बहुत लेखक जैसा हूँ लेकिन शायद मैं मजदूर था तब गलत था. मुझे लेखक बनने की बात नहीं सोचनी चाहिए थी. मैं इतना नौसिखिया लेखक हूँ की मैं शब्दों में इस दृश्य को नहीं लिख सकता. ना ही मैं कला का इतना धनी हूँ की अचानक से एक चित्रकार बनकर तुम्हारे इस चित्र को बनाकर अमर हो जाऊं. तुम्हें कभी किसी मजदूर का सपना आया था? तुम्हारी बंद आँखें समुन्दर में डूबे जहाज जैसी क्यूँ हैं? तुम्हारे काले घने केश मुझे किसी और दुनिया के पवित्र ग्रंथों के श्लोक/आयत जैसे क्यूँ लगते हैं?तुम्हारे ये गीले बाल जब सुख जायेंगे. जब तुम्हारी आँखें खुलेगी तब भी शायद मैं दुनिया की सबसे पवित्र रूह से भी ज्यादा खूबसूरत तुम्हारे चेहरे और काले गीले बालों के लिए चार-पांच हिले डुले शब्दों से ज्यादा कुछ नहीं लिख पाया होऊंगा. मैं शायद उस कमरे में ही तुम्हे निहारते-निहारते बुत बन गया होउंगा या फिर आने वाले 20 साल बाद इसी तरह के किसी कमरे में बैठकर तुम्हारे इस चेहरे और गीले बालों को कैनवास में उतारने की तैयारी में लग गया होउंगा.
अरहान

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