The Premonition by Banana Yoshimoto In Hindi: आज से एक दशक पहले मुझे एक लेखक का नाम मालूम हुआ था “हरुकी मुराकामी”. इनकी मैंने दो तीन उपन्यास पढ़े, कुछ कहानी संग्रह भी. इन किताबों को पढने के बाद मुझे अचानक से जापानी साहित्य से एक अलग तरह का लगाव हो गया है. मैंने इसके बाद कई बेहतरीन उपन्यास गूगल से ढूंढ-ढूंढ कर पढ़े. किगो हिगाशिनो, यासुनारी कावाबाता, कोबो अबे, काजुओ इशिगिरो से होते हुए अचानक एक दिन नज़र बनाना योशिमोतो नामक लेखिका के एक किताब पर पड़ी. “द प्रेमोनिशन,” जिसका अनुवाद असा योनेदा ने किया है.
कहानी 19 वर्षीय यायोई के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके पास सब कुछ है – एक खुशहाल परिवार जिसमें डॉक्टर पिता और नर्स माँ हैं, और एक छोटा भाई है तेत्सुओ, जिससे उसे बहुत लगाव है। सबकुछ बढ़िया है सबकुछ ठीक है लेकिन एक छोटी सी दिक्कत है : यायोई को अपने बचपन की कोई याद नहीं है। फिर, अचानक, उसे रह रह के बीते लम्हों की कुछ झलकियाँ नज़र आने लगती हैं। ये अतीत के वो टुकड़े होते हैं, जो उसे उसके जीवन के उन पहलुओं के बारे में धीरे धीरे बताती है जिसके बारे में उसे पहले पता नहीं होता।
उपन्यास अपनी रफ़्तार पर तब आता है जब एक दिन योयोई की चाची युनुकी एक दिन अपने घर से लापता हो जाती है. उपन्यास की कहानी परत दर परत तब खुलने लगती है जब योयोई और उसका भाई तेत्सुओ अपनी चाची की तलाश में उन्हें ढूँढने निकलते है. इसी तलाश में यह पता चलता है कि तेत्सुओ योयोई का सगा भाई नहीं है और युनुकी भी उसकी चची ना होकर रिश्ते में उसकी सगी बहन है.
इस उपन्यास की कहानी यूपी बिहार के गांवों की टूटी फूटी सड़कों पर पिकप जैसी गाडी पर सवारी करने जैसा है। कहानी में कई उतार-चढ़ाव होते हैं, और जब आपको लगता है कि आप एक रोमांचक मोड़ की ओर जा रहे हैं, तो यह एक शांत सवारी में बदल जाता है। यह एक किताब है जो एक्शन से भरपूर दृश्यों या गहरे, जटिल विचारों के बजाय अनुभव और मूड के बारे में अधिक है। मूड जैसे कोई जाड़े की धुप में घर के आँगन में बैठा मूंगफली खा रहा हो और अपने जीवन की कुछ अच्छी बुरी यादों को सोचकर हंस रहा हो दुखी हो रहा पर मूंगफली खाना नहीं छोड़ रहा हो.
योशिमोतो की लेखन शैली सीधी-सादी है, लेकिन इसमें एक जादू है, जादू जो क्षणभर के लिए आपको एक अदृश्य पंख दे देता है और पन्नों के बीच उगे एक खुले आसमान में आपको अपनी यादों के साथ तैरने के लिए बाध्य कर देता है. यह ऐसा है मानो जैसे योशिमोटो ने साधारण शब्दों को असाधारण बनाने के लिए उसमे अपनी कल्पना के कुछ जादुई कण शब्दों की मात्राओं में टांक दिए हो।
कहानी में यायोई की यात्रा का विकास बहुत सुंदर लेकिन थोड़ा डरावना है। कभी-कभी, यह थोड़ा ज्यादा मीठा लगता है, जैसे आपने एक दिन बेवजह ढेर सारी मिठाई खा ली हो। कई बार यहाँ कहानी इतनी गाढ़ी हो जाती है की लगता है आप इसी मिठाई के चाशनी में फंस चुके हो, एक इंसान की तरह नहीं एक मक्खी की तरह. यह बात कहानी को कई बार बहुत भयानक बना देती है. किताब कुछ भारी विषयों को छूती है, लेकिन इसे गहराई से नहीं खोदती है। यह ऐसा है मानो योशिमोटो हमें कुछ बड़ी चीजों की झलक दिखा रही हों, लेकिन फिर पूरी तस्वीर दिखाने से पहले ही पर्दा बंद कर देती हैं।
यह एक अच्छी किताब है, खासकर अगर आप ऐसी कहानियों में रुचि रखते हैं जो थोड़ी सपने जैसी महसूस होती हैं। योशिमोतो की यह खासियत है कि वह आपको जीवन की साधारण चीजों को देखने और उनमें थोड़ा जादू पाने का अहसास कराती हैं। यह एक ऐसी किताब नहीं है जो आपको हिला देगी या पढ़कर आप को अचानक से नवरस के किसी भी भाव का तीव्र अहसास होगा, लेकिन यह निश्चित रूप से आपको परिवार, यादों और अतीत के बारे में सोचने के लिए बहुत कुछ छोड़ देगी। मानो जैसे आप बचपन के किसी मेले में अचानक से अपने पिता या मां की अँगुलियों से बिछुड़ जाते हो लेकिन कुछ क्षणों के बाद आपके माता-पिता आपसे मिल जाते हैं. आप खुश होते हो. आपका बचपन बीत जाता है लेकिन फिर आपको एक दिन पता चलता है कि मेले में जो आपसे मिले थे वो आपके माता पिता नहीं थे. आप इसलिए उन्हें अपने अपना माता पिता मानने लगते हैं क्योंकि आपको खो जाने से बहुत डर लगता है.
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