मैं इंतजार की दास्ताँ क्या सुनाऊँ बातों मे
एक दोपहरी
ठहर के बीत गयी
काली बेचैन रातों में
जैसे चीखों के बाग में खामोशी के फूल खिले हुए
बहुत कहना चाहते हैं मेरे ये लब मुहब्बत के धागों से सिले हुए
दिल को बड़ा सुकूँ आया है तुम्हारे बगीचे में आम देखकर
इस बार तोड़े जाने का वाकया दिल के साथ नहीं होगा
दिल में जला देती है पुराने जख्मों के चराग़
मधु कि तासीर कितनी ठंडी होती है
कितना पहरा लगा रखा है जेहन ने दिल के आगे
मुहब्बत का मु भी कहता हूँ
तो थप्पड़ मार देता है
बहुत अदब है दिल के संदूकों में
बस कोई छेड़ता है मुहब्बत की बातें
बेअदब हो जाते हैं हम
अपने खून से सनी शर्ट से रोक देते होंगे दुनिया भर की ट्रेन
या फिर कसकर बाहों में भींच लेते होंगे
क्या करते होंगे लोग
आखिरी अलविदा कहने के बाद
इस बात का हिसाब रखकर
कि कितना खामोश रहना है
तुम मोहब्बत बेहिसाब करना
क्या हुआ होगा
उन दो दरख्तों के दरमियाँ
पत्ते तो नहीं टूटे थे
पतझड़ कैसे आया
सदियों बाद गूंजेगी मेरी आवाज दुनिया में
मैंने जो आखिरी लफ्ज़ कहा था
वो बर्फ में जमकर जीवाश्म बन गया होगा
मै चलकर फिर हर रोज इतना सफर नहीं करता
मेरे वश में होता
तो अपनी आँखें टांक देता
आपके कमरे की दीवार पर
क्या हुआ था जब आपने नाम हमारा खत में लिखा
आपके हाथ कांपें थे
या फिर सच में कोई जलजला आया था
हम जानते थे कि क्या हैसियत थी हमारी दुनिया मे
आपका खत जेब मे रखकर खुद को दौलतमंद समझते थे
बड़े रो कर आपने हमारा नाम लिया
क्या हम मर गए थे आपकी कहानी में
ये जो इतनी नफरत की है तुमने मुहब्बत करने की आड़ में
इतनी नफरत तो कोई चाय पर जमी मलाई से भी नही करता
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