Colorless Tsukuru Tazaki बुक रिव्यू

Colorless Tsukuru Tazaki बुक रिव्यू: जब दोस्त बिना बताए छोड़ जाते हैं

Colorless Tsukuru Tazaki बुक रिव्यू: रात के ग्यारह बज रहे हैं। आप अपने फ़ोन की गैलरी में पुरानी तस्वीरें देख रहे हैं और अचानक कॉलेज के ज़माने की एक ग्रुप फ़ोटो सामने आ जाती है। पाँच चेहरे, एक-दूसरे के कंधों पर हाथ, आँखों में वो बेफ़िक्री जो सिर्फ़ उन्हीं दिनों में होती है। और फिर एक सवाल चुपचाप सीने में उतरता है: ये लोग अब कहाँ हैं? आख़िरी बार बात कब हुई थी? किसने पहले जवाब देना बंद किया—उन्होंने या आपने?

हम सब की ज़िंदगी में कोई न कोई ऐसा दोस्त होता है जो बिना किसी झगड़े, बिना किसी वजह के धीरे-धीरे, या कभी-कभी अचानक, ग़ायब हो जाता है। कोई एक्सप्लेनेशन नहीं, कोई क्लोज़र (closure) नहीं। बस एक खाली जगह रह जाती है, जिसके इर्द-गिर्द हम बाक़ी की ज़िंदगी बुनते रहते हैं। हारुकी मुराकामी का उपन्यास Colorless Tsukuru Tazaki and His Years of Pilgrimage (2013, अंग्रेज़ी अनुवाद: फिलिप गैब्रियल, 2014) इसी खाली जगह की कहानी है। और यही वजह है कि यह रिव्यू लिखते हुए मुझे बार-बार लगा कि मैं किसी किताब के बारे में नहीं, बल्कि अपने ही किसी पुराने ज़ख़्म के बारे में लिख रहा हूँ।

कहानी क्या है? (बिना स्पॉइलर के) Colorless Tsukuru Tazaki बुक रिव्यू

त्सुकुरु ताज़ाकी छत्तीस साल का एक इंजीनियर है जो टोक्यो में रेलवे स्टेशन डिज़ाइन करता है। बचपन से उसे स्टेशनों से अजीब-सा लगाव है; वो घंटों बैठकर ट्रेनों को आते-जाते देख सकता है। ऊपर से उसकी ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य दिखती है, लेकिन भीतर एक पुराना घाव है जो सोलह साल से रिस रहा है।

हाई स्कूल में उसके चार पक्के दोस्त थे: दो लड़के, दो लड़कियाँ। मज़ेदार बात यह है कि चारों के नामों में एक रंग छिपा था: अका (लाल), आओ (नीला), शिरो (सफ़ेद) और कुरो (काला)। सिर्फ़ त्सुकुरु का नाम “रंगहीन” था, और यही छोटी-सी बात उसके भीतर हमेशा एक हल्की-सी टीस बनकर बैठी रही। पाँचों का ग्रुप इतना परफ़ेक्ट था कि उसे किसी अनोखे संयोग जैसा कहा गया है—ऐसा मेल जो ज़िंदगी में सिर्फ़ एक बार बनता है।

फिर कॉलेज के दूसरे साल, एक दिन, चारों दोस्त उससे कहते हैं: “अब हमसे कभी संपर्क मत करना।” कोई वजह नहीं बताई जाती। त्सुकुरु पूछने की हिम्मत भी नहीं करता। इसके बाद वह क़रीब छह महीने मौत के बारे में सोचता रहता है। उपन्यास की शुरुआत ही इसी अँधेरे दौर से होती है, और जिस ठंडी, सटीक भाषा में मुराकामी ने इस डिप्रेशन को लिखा है, वह पढ़कर रह-रहकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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सोलह साल बाद त्सुकुरु की ज़िंदगी में सारा आती है—उससे दो साल बड़ी, समझदार और साफ़ नज़र वाली एक औरत। वह कहती है कि जब तक त्सुकुरु अपने अतीत का सामना नहीं करेगा, वह किसी से सच्चा रिश्ता नहीं बना पाएगा। और यहीं से शुरू होता है त्सुकुरु का “पिल्ग्रिमेज” (तीर्थयात्रा)—नागोया से फ़िनलैंड तक, उन चार दोस्तों की तलाश में, यह जानने के लिए कि सोलह साल पहले आख़िर हुआ क्या था।

सच जब सामने आता है, तो वह उतना ही अजीब, उतना ही दुखद और उतना ही उलझा हुआ है जितनी ख़ुद ज़िंदगी। मैं यहाँ उस राज़ को नहीं खोलूँगा, बस इतना कहूँगा: इस किताब में एक हत्या भी है, एक झूठा इल्ज़ाम भी, और एक ऐसा सपना भी जिसकी सरहद हक़ीक़त से मिलती है।

Colorless Tsukuru Tazaki बुक रिव्यू: किताब के मुख्य थीम (Themes)

1. छोड़ दिए जाने का दर्द और क्लोज़र की तलाश: यह उपन्यास रिजेक्शन के बारे में उतना नहीं है, जितना उस ख़ामोशी के बारे में है जो रिजेक्शन के बाद आती है। त्सुकुरु का दुख यह नहीं कि दोस्तों ने उसे छोड़ा; दुख यह है कि किसी ने बताया ही नहीं कि क्यों। मुराकामी दिखाते हैं कि इंसान अपमान सह सकता है, लेकिन अनुत्तरित सवाल उसे भीतर से खोखला कर देते हैं।

2. रंगहीन होने का एहसास (ख़ुद को साधारण मान लेना): त्सुकुरु ख़ुद को “खाली बर्तन” समझता है—बिना रंग, बिना ख़ासियत, बिना पर्सनैलिटी का आदमी। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसके पुराने दोस्त उसे बताते हैं कि वे उसे कैसे देखते थे, और वह तस्वीर बिल्कुल अलग है। यह किताब की सबसे ख़ूबसूरत बात है: हम अपने बारे में जो कहानी ख़ुद को सुनाते हैं, ज़रूरी नहीं कि वही सच हो।

3. याददाश्त और वक़्त: उपन्यास में एक विचार बार-बार लौटता है—यादों को छिपाया जा सकता है, लेकिन उस इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता जिसने हमें बनाया है। सोलह साल बाद भी त्सुकुरु के भीतर वही बीस साल का लड़का बैठा है, स्टेशन की बेंच पर, ट्रेनों को जाते हुए देखता हुआ।

4. संगीत: लिस्त की पियानो रचना “Le mal du pays” (Years of Pilgrimage सुइट से) पूरे उपन्यास में किसी किरदार की तरह मौजूद है। इस फ़्रेंच वाक्यांश का मतलब किताब में कुछ यूँ समझाया गया है: वो बेवजह की उदासी जो किसी शांत, पहाड़ी नज़ारे को देखकर दिल में उतर आती है। किताब का पूरा मूड इसी एक एहसास में समाया हुआ है।

इस किताब से क्या सीख मिलती है? (Key Takeaways)

  • बिना जवाब के जीना सबसे भारी सज़ा है: और जवाब माँगना हिम्मत का काम है। त्सुकुरु सोलह साल सिर्फ़ इसलिए तड़पता है क्योंकि उसने कभी पूछा नहीं। सारा का एक ही वाक्य उसकी ज़िंदगी बदल देता है: “जाओ और पूछो।”
  • हम ख़ुद को जितना साधारण समझते हैं, दूसरों की नज़र में उतने साधारण नहीं होते: “कलरलेस” होना त्सुकुरु की हक़ीक़त नहीं, उसका सेल्फ-इमेज है।
  • कोई ग्रुप हमेशा नहीं रहता: और उसे बचाने की कोशिश में कभी-कभी हम उसे और जल्दी खो देते हैं। पाँचों दोस्तों की हार्मनी इतनी नाज़ुक थी कि एक झूठ ने उसे तोड़ दिया, और किसी ने सवाल इसलिए नहीं पूछा क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं बाक़ी सब न बिखर जाए।
  • ज़ख़्म का सामना करना ही असली तीर्थयात्रा है: किताब के टाइटल का “पिल्ग्रिमेज” किसी मंदिर की यात्रा नहीं, अपने ही अतीत के दरवाज़े खटखटाने का सफ़र है।

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?

  • लिटरेरी फ़िक्शन (Literary Fiction) के पाठक, जिन्हें धीमी आँच पर पकती कहानियाँ पसंद हैं।
  • वे लोग जिन्होंने कभी दोस्ती में धोखा या दूरी झेली है। यह किताब आपको पढ़ते हुए कई बार रुकना पड़ेगा।
  • मुराकामी में नए पाठक। सच कहूँ तो 1Q84 या Kafka on the Shore की तुलना में यह उपन्यास कहीं ज़्यादा रियलिस्टिक और सीधा है। मुराकामी शुरू करने के लिए यह Norwegian Wood के बाद सबसे अच्छा एंट्री पॉइंट है।
  • तीस पार के पाठक, जो अपने बीस साल की उम्र के फ़ैसलों और रिश्तों को पलटकर देखने लगे हैं।
  • धीमे, मूड-ड्रिवन उपन्यासों के प्रेमी, जिन्हें प्लॉट से ज़्यादा एटमॉस्फ़ियर चाहिए।

किसे यह किताब पसंद नहीं आएगी?

ईमानदारी से कहूँ तो, अगर आप फ़ास्ट-पेस्ड थ्रिलर या साफ़-सुथरे अंत वाली कहानियाँ ढूँढ रहे हैं, तो यह किताब आपको निराश करेगी। कुछ सवालों के जवाब मुराकामी जानबूझकर नहीं देते (ख़ासकर हत्या और हाइदा वाले हिस्से में), और बहुत से पाठकों को यह अधूरापन खलता है। किताब की रफ़्तार धीमी है, बीच में सपनों और हक़ीक़त की सीमा धुँधली हो जाती है, और अंत एक खुले दरवाज़े जैसा है। साथ ही, इसमें कुछ बेबाक सेक्सुअल पैसेज और डिप्रेशन का गहरा चित्रण है, बहुत कम उम्र के या सेंसिटिव पाठकों को इसका ध्यान रखना चाहिए।

राइटिंग स्टाइल: बर्फ़ के नीचे बहता पानी

मुराकामी की भाषा (फिलिप गैब्रियल के अनुवाद में) यहाँ हैरान करने वाली हद तक सादी है। छोटे वाक्य, रोज़मर्रा के ब्यौरे—त्सुकुरु क्या खाता है, कैसे तैरता है, कौन-सी शर्ट पहनता है। लेकिन यही सादगी धोखा है। सतह पर सब शांत है, और नीचे भावनाओं की तेज़ धारा बह रही है। यह वही मिनिमल, जासूसी-सी ठंडी नैरेशन है जो मुराकामी की पहचान है। थर्ड पर्सन में लिखी गई है, लेकिन इतनी क़रीब से कि हर पन्ने पर त्सुकुरु की साँसें सुनाई देती हैं।

इमेजरी कमाल की है। दर्द को अक्सर ठोस चीज़ों में बदल दिया गया है: अकेलापन सैकड़ों मील लंबी खिंची हुई केबल बन जाता है, तो चेतना रात की आख़िरी ट्रेन की तरह दूर जाती हुई बत्ती। कहानी की संरचना भी दिलचस्प है। वर्तमान और अतीत आपस में गुँथे हुए चलते हैं, और बीच में हाइदा के पिता वाली कहानी (मिदोरिकावा नाम का जैज़ पियानिस्ट और मौत का “टोकन”) एक कहानी-के-भीतर-कहानी की तरह आती है, जो पूरे उपन्यास पर एक रहस्यमयी परछाई डाल देती है।

किताब का दर्शन: यही इस रिव्यू का दिल है

गहराई में जाएँ तो यह उपन्यास पूछता है: क्या हम कभी सच में जान सकते हैं कि दूसरों की नज़र में हम कौन हैं? त्सुकुरु ख़ुद को रंगहीन मानता है; उसके दोस्त उसे ग्रुप का सबसे सुंदर, सबसे स्थिर आदमी मानते थे। दोनों में से सच कौन-सा है? शायद दोनों। शायद कोई भी नहीं। मुराकामी आइडेंटिटी को कोई ठोस चीज़ नहीं मानते; वह दूसरों की नज़रों, यादों और ग़लतफ़हमियों से मिलकर बनी एक धुंधली तस्वीर है।

दूसरा बड़ा सवाल गिल्ट (अपराध बोध) का है: क्या हम उन गुनाहों के लिए भी ज़िम्मेदार हो सकते हैं जो हमने किए ही नहीं? किताब में सपनों की दुनिया और असल दुनिया के बीच की दीवार जगह-जगह दरकती है, और त्सुकुरु को यह डर सताता है कि शायद उसके भीतर का कोई अँधेरा हिस्सा, कहीं और, कुछ ऐसा कर आया है जिसकी उसे ख़बर ही नहीं।

और तीसरा, शायद सबसे कोमल विचार यह है कि वक़्त सब कुछ नहीं बहा ले जाता। फ़िनलैंड की झील किनारे एरी (कुरो) से मिलने के बाद त्सुकुरु के मन में जो बात आती है, उसका भाव कुछ ऐसा है: हमने उस दौर में सच में किसी चीज़ पर यक़ीन किया था, और पूरे दिल से यक़ीन कर पाने की वह ताक़त कभी पूरी तरह मिटती नहीं। मेरे लिए यही इस उपन्यास की आत्मा है—नुक़सान की कहानी के भीतर छिपी उम्मीद की एक पतली, ज़िद्दी लकीर।

अगर आपको ये पसंद है, तो यह किताब भी छू जाएगी

  • Norwegian Wood (मुराकामी): दोनों उपन्यास मुराकामी के सबसे रियलिस्टिक काम हैं। फ़र्क़ यह कि Norwegian Wood बीस साल की उम्र में खड़ा है, और यह किताब छत्तीस की उम्र से पलटकर बीस को देखती है।
  • Never Let Me Go (काज़ुओ इशिगुरो): वही दबा हुआ दुख, वही “जो खो गया उसे शब्द न दे पाना।”
  • अक्टूबर (October) फ़िल्म: शूजित सरकार की इस फ़िल्म जैसी कहानियों में प्लॉट कम और एहसास ज़्यादा होता है। ख़ामोशी ही भाषा होती है। अगर तमाशा का वेद आपको समझ आया था—वो आदमी जो समाज के लिए ख़ुद को रंगहीन बना लेता है—तो त्सुकुरु आपको अपना ही लगेगा।

किताब के कुछ अहम विचार (हिंदी भावानुवाद)

(नोट: किताब कॉपीराइटेड है, इसलिए नीचे दिए गए अंश शब्दशः कोट्स नहीं, बल्कि मूल विचारों का हिंदी भावानुवाद हैं।)

  • मौत के दरवाज़े वाला विचार: त्सुकुरु सोचता है कि अगर उन दिनों उसके पास मौत तक जाने वाला कोई सीधा दरवाज़ा होता, तो वह बिना झिझक उसे खोल देता, जैसे वह रोज़मर्रा का कोई मामूली काम हो। यह पंक्ति डिप्रेशन को जितनी सच्चाई से पकड़ती है, उतनी सच्चाई मैंने बहुत कम किताबों में देखी है: मरने की इच्छा नहीं, बस जीते रहने की वजह का ग़ायब हो जाना।
  • “Le mal du pays” की व्याख्या: एक बेवजह की उदासी, जो किसी शांत ग्रामीण दृश्य को देखकर दिल में जाग उठती है। पूरा उपन्यास इसी एक एहसास का विस्तार है।
  • यादों पर एरी की बात: यादों को कहीं छिपा देना मुमकिन है, लेकिन उस इतिहास को मिटाना मुमकिन नहीं जिसने हमें गढ़ा है।
  • आख़िरी पन्नों का भाव: दुनिया में बहुत-सी चीज़ें ऐसी हैं जिनके लिए सिर्फ़ मोहब्बत काफ़ी नहीं होती; ज़िंदगी लंबी है, और कभी-कभी बेरहम भी। यह वाक्य रोमांस की चाशनी में डूबी किताबों के बिल्कुल उलट है, और इसीलिए दिनों तक याद रह जाता है।

सबसे ताक़तवर हिस्से

  • शुरुआती अध्याय का डिप्रेशन चित्रण: बिना किसी ड्रामे के, ठंडी और सटीक भाषा में लिखा गया वह दौर जब त्सुकुरु “जीते-जी मरा हुआ” था।
  • हाइदा के पिता की सुनाई कहानी: पहाड़ के हॉट स्प्रिंग में मिला रहस्यमय पियानिस्ट मिदोरिकावा, जो मौत का “टोकन” लिए घूमता है। यह हिस्सा उपन्यास को अचानक किसी और ही स्तर पर ले जाता है।
  • आओ से लेक्सस शोरूम में मुलाक़ात: सोलह साल बाद पहला सामना, और वह पल जब त्सुकुरु को पहली बार पता चलता है कि उस पर इल्ज़ाम क्या था। पढ़ते हुए साँस रुक जाती है।
  • फ़िनलैंड की झील किनारे एरी से बातचीत: पूरी किताब का भावनात्मक शिखर। दो टूटे हुए लोग, सोलह साल की ख़ामोशी, और आख़िरकार, सच।
  • आख़िरी अध्याय: स्टेशन की बेंच, रात की ट्रेनें, और एक फ़ोन कॉल का इंतज़ार। मुराकामी ने अंत को जिस तरह खुला छोड़ा है, वह आपको दिनों तक बेचैन रखेगा।

क्रिटिकल एनालिसिस: क्या खलता है?

पहले तारीफ़: मुराकामी ने यहाँ अपने जादुई-यथार्थवाद को लगाम में रखा है, और नतीजा उनकी सबसे संयमित, सबसे इंसानी किताबों में से एक है। किरदार (ख़ासकर एरी और सारा) असली लगते हैं, दर्द असली लगता है।

अब ईमानदारी: कुछ चीज़ें अधूरी छूटती हैं। हाइदा की कहानी का धागा बीच में ही छोड़ दिया गया है; वह किरदार जितने वादे के साथ आता है, उतनी ही ख़ामोशी से ग़ायब हो जाता है। हत्या का रहस्य कभी नहीं सुलझता। मैं समझता हूँ कि यह जानबूझकर है (किताब जवाबों के बारे में नहीं, जवाबों के बिना जीने के बारे में है), लेकिन हर पाठक इतना उदार नहीं होगा। महिला किरदारों का चित्रण भी कहीं-कहीं मुराकामी की पुरानी आदतों में फिसलता है; शिरो को उसकी सुंदरता और नाज़ुकता से ज़्यादा परिभाषित नहीं किया गया। और सपने वाले हिस्सों की व्याख्या का बोझ पूरी तरह पाठक पर डाल दिया गया है। यह किसी के लिए ख़ूबी है, तो किसी के लिए खीझ।

फ़ाइनल वर्डिक्ट

कुछ किताबें ख़त्म हो जाती हैं, और कुछ किताबें साथ रह जाती हैं। Colorless Tsukuru Tazaki दूसरी क़िस्म की किताब है। इसे पढ़कर आप शायद अपने किसी पुराने दोस्त को मैसेज करना चाहेंगे, या कम से कम उस मैसेज के बारे में देर तक सोचेंगे जो आपने कभी नहीं भेजा। यह उपन्यास कोई जवाब नहीं देता, लेकिन आपके अपने अनुत्तरित सवालों के साथ बैठना सिखा देता है। और शायद साहित्य का इससे बड़ा काम कोई नहीं।

अगर आप ज़िंदगी में कभी बिना वजह छोड़े गए हैं—किसी दोस्त, किसी रिश्ते, किसी दौर के द्वारा—तो यह किताब आपके लिए लिखी गई है।

रेटिंग: 4.25/5 क्यों: भावनात्मक गहराई और राइटिंग स्टाइल के लिए पूरे नंबर; हाइदा वाले अधूरे धागे और कुछ अनसुलझे सवालों के लिए थोड़ी कटौती। मुराकामी की किताबों में मैं इसे Norwegian Wood और Kafka on the Shore के ठीक बाद रखूँगा।


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. Colorless Tsukuru Tazaki किताब किस बारे में है? यह हारुकी मुराकामी का 2013 का उपन्यास है, जिसमें छत्तीस साल का त्सुकुरु ताज़ाकी यह पता लगाने निकलता है कि सोलह साल पहले उसके चार सबसे क़रीबी दोस्तों ने अचानक, बिना कोई वजह बताए, उससे नाता क्यों तोड़ लिया था। यह दोस्ती, अकेलेपन, पहचान और अतीत से सुलह की कहानी है।

2. क्या यह किताब पढ़ने लायक है? हाँ, ख़ासकर अगर आपको भावनात्मक गहराई वाली लिटरेरी फ़िक्शन पसंद है। यह मुराकामी की सबसे रियलिस्टिक और एक्सेसिबल किताबों में से एक है। लेकिन अगर आप तेज़ रफ़्तार प्लॉट और साफ़ अंत चाहते हैं, तो यह आपके लिए नहीं है।

3. यह किताब किसे पढ़नी चाहिए? साहित्यिक उपन्यासों के पाठक, दोस्ती के बिखरने का दर्द जानने वाले लोग, धीमी और मूड-ड्रिवन किताबों के प्रेमी, और तीस पार के वे पाठक जो अपने अतीत को पलटकर देखने लगे हैं।

4. क्या यह किताब शुरुआती पाठकों के लिए सही है? मुराकामी शुरू करने के लिए, बिल्कुल हाँ। यह उनकी सबसे कम जटिल किताबों में से है। लेकिन बिल्कुल नए फ़िक्शन पाठकों के लिए इसकी धीमी रफ़्तार और खुला अंत थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

5. इस किताब की मुख्य सीख क्या है? अनुत्तरित सवालों के साथ जीना सबसे भारी बोझ है, और अपने अतीत का सामना करना ही असली मुक्ति है। साथ ही, हम ख़ुद को जितना साधारण (“रंगहीन”) समझते हैं, दूसरों की नज़र में अक्सर उससे कहीं ज़्यादा होते हैं।

6. इस किताब की भाषा कैसी है? बेहद सादी, साफ़ और मिनिमल। छोटे वाक्य, रोज़मर्रा के ब्यौरे, लेकिन सतह के नीचे गहरी भावनात्मक धारा। फिलिप गैब्रियल का अंग्रेज़ी अनुवाद बहुत सहज है। हिंदी पाठक जिन्हें अंग्रेज़ी की सामान्य समझ है, वे इसे आराम से पढ़ सकते हैं।

7. क्या इस किताब में स्पॉइलर जैसा कोई बड़ा ट्विस्ट है? हाँ, कहानी के बीच में एक बड़ा खुलासा है (त्सुकुरु पर लगा इल्ज़ाम) और एक हत्या का ज़िक्र है। हालाँकि, इस रिव्यू में मुख्य रहस्य नहीं खोला गया है।

8. इस किताब को पढ़ने के बाद कैसा महसूस होता है? एक मीठी-सी उदासी, जैसे किसी पुराने दोस्त से मिलकर लौटे हों और रास्ते भर खिड़की से बाहर देखते रहे हों। किताब का फ़्रेंच वाक्यांश “Le mal du pays” (बेवजह की उदासी) ही इसका सबसे सही जवाब है।

9. क्या Colorless Tsukuru Tazaki में जादुई यथार्थवाद (Magical Realism) है? बहुत हल्का। यह मुराकामी की सबसे रियलिस्टिक किताबों में से है, लेकिन सपनों और हक़ीक़त की सीमा कुछ जगहों पर धुँधली होती है, ख़ासकर हाइदा और मिदोरिकावा वाले हिस्सों में।

10. किताब के टाइटल में “Years of Pilgrimage” का क्या मतलब है? यह दोहरा संदर्भ है। एक तरफ़ फ़्रांज़ लिस्त की पियानो रचना Years of Pilgrimage की ओर, जो उपन्यास में बार-बार बजती है; दूसरी तरफ़ त्सुकुरु की अपनी “तीर्थयात्रा” की ओर, अपने अतीत और पुराने दोस्तों तक की यात्रा।

11. क्या यह किताब Norwegian Wood जैसी है? मूड में हाँ, दोनों रियलिस्टिक हैं, दोनों में जवानी, नुक़सान और डिप्रेशन है। फ़र्क़ यह कि Norwegian Wood जवानी के भीतर से लिखी गई है, जबकि यह किताब अधेड़ उम्र से जवानी को पलटकर देखती है, इसलिए इसमें नॉस्टेल्जिया की परत ज़्यादा गहरी है।

12. क्या इस किताब का हिंदी अनुवाद उपलब्ध है? मेरी जानकारी में इसका आधिकारिक हिंदी अनुवाद व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है; ज़्यादातर भारतीय पाठक इसे फिलिप गैब्रियल के अंग्रेज़ी अनुवाद में ही पढ़ते हैं, जो ऑनलाइन आसानी से मिल जाता है। ख़रीदने से पहले एक बार ताज़ा उपलब्धता ज़रूर जाँच लें।

किताब यहाँ से खरीदें: https://www.amazon.in/Colorless-Tsukuru-Tazaki-Years-Pilgrimage-ebook/dp/B00I3DNUR6

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