टैग: प्रेम कविता
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डर
मुझे अब मूंगफली खाने से डर लगता है मुझे अब गोलगप्पे खाने से डर लगता है मुझे अब श्याम टाकीज के नाम से भी डर लगता है मुझे अपने शहर के हर उस जगह से हर उस चीज से डर लगता है जिस से तुम जुड़ी हो मैं जुड़ा हूँ मुझे डर लगता है अब शादी के कार्ड से डर लगने लगता है…
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छोटे शहरों मे प्यार
छिप छिपाकर होता है जवां प्यार छोटे शहरों मेकिसी गुमनाम गली के अँधेरे कोने मेंयहाँ अक्सर कान खोल कर खड़ी होती है दीवारेंइसलिए खामोशियाँ में सब कुछ बयाँ करना होता हैशुरू होते है खतों के सिलसिलेतमन्नाये लेती है अंगडाई कागजों मेंलगने लगता है सब कुछ अद्भुत अनोखा साबीतने लगता है वक्तख्वाबों के स्वेटर बुनने मेंइस…
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कमल के फूल
देखो, खिलें हैं कमाल के फूलइस गंदे तालाब मेंये हमें बताना चाहते हैंकी इनकी जिद के आगे टिक नहीं पायाइस तालाब का गंदा पानीफीकी ना कर सकी इनकी गुलाबी रंगतकिनारों की ये मटमैली मिटटीफर्क ना पड़ा इनकी सुगंध कोमरी हुयी मछलियों की बू सेबाँध ना सकी इनकोयहाँ वहाँ उग आईए जल्कुम्भियों की लताएँदेखो ये बता…