क़यामत का दिन

जिस तरह जमीन देखती है आसमान की तरफ
और आसमान देखता है जमीन की तरफ
ठीक उसी तरह हम दोनों
एक दुसरे को देखते हैं
दिओन में मिलने का ख्याल पाले हुए
दुनिया भर की तमाम मजबूरियों का मलाल पाले हुये
हम दोनों जानते हैं की
क़यामत से पहले आसमान और जमीन एक नहीं होने वाले
इसलिए हम दोनों इन्तेजार कर रहे हैं
अपनी अपनी छत के मुंडेरों पर बैठकर
कब आएगा क़यामत का वो दिन
जब हम  मिलेंगे
जमीन और आसमान की तरह

अराहान 

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