मुझे याद है वो रात जब मैंने पहली बार कुछ लिखा था और सोचा था कि शायद यही है। शायद यही वो चीज़ है जो मुझे करनी है।
लिखा क्या था? कुछ खास नहीं। कुछ लाइनें थीं, थोड़ी टेढ़ी-मेढ़ी, थोड़ी कच्ची। लेकिन उन्हें लिखते वक्त जो महसूस हुआ था, वो एक अजीब-सी राहत थी। जैसे कोई चीज़ जो बहुत देर से भीतर अटकी हुई थी, आखिरकार बाहर आ गई। जैसे साँस रुकी हुई थी और अब ली गई।
उस रात मैंने सोचा था, बस अब मैं लेखक हूँ।
मैं गलत था।
लेखक उस रात नहीं बना था। लेखक तो अभी भी बन रहा हूँ। हर उस सुबह जब बैठता हूँ और शब्द नहीं आते। हर उस रात जब लिखी हुई चीज़ पढ़ता हूँ और लगता है कि यह किसी और ने लिखी है। किसी ऐसे इंसान ने जो मुझसे बेहतर था, या शायद मुझसे बहुत बुरा। हर उस पल में जब कागज़ सफेद रहता है और मैं उसे घूरता रहता हूँ।
Stephen King ने On Writing में एक बात कही है जो मुझे बहुत देर बाद समझ आई।
उन्होंने कहा, “I don’t believe writers can be made, either by circumstances or by self-will. The equipment comes with the original package.”
यानी लेखक बनाए नहीं जाते।
लेकिन वो यह भी कहते हैं, “I believe large numbers of people have at least some talent as writers and storytellers, and that those talents can be strengthened and sharpened.”
यानी जो है उसे तराशा जा सकता है। जो बीज है उसे सींचा जा सकता है। लेकिन बीज तो पहले से है। वो कोई दे नहीं सकता।
King के बेडरूम की वो कील
Stephen King जब किशोर थे तब उनके बेडरूम में एक कील थी।
उस कील पर वो अपने rejection slips टाँगते थे। हर बार जब कोई पत्रिका उनकी कहानी लौटाती, वो उस पर्ची को उस कील पर टाँग देते और फिर बैठ जाते। अगली कहानी लिखने के लिए।
वो कील एक दिन झुक गई। इतने rejection slips हो गए थे कि कील उनका बोझ नहीं उठा सकती थी। King ने कील निकाली और उसकी जगह एक बड़ी कील ठोकी।
और लिखते रहे।
मैं जब यह पढ़ता हूँ तो मुझे यह किसी motivational quote जैसा नहीं लगता। यह किसी इंसान की असली ज़िंदगी है। एक लड़के की ज़िंदगी जो एक टूटे-फूटे घर में रहता था, जिसकी माँ अकेले उसे पाल रही थीं, जो laundry में काम करता था और रात को टेबल पर बैठकर लिखता था। इसलिए नहीं कि उसे पता था कि वो एक दिन मशहूर होगा, बल्कि इसलिए कि वो कुछ और नहीं कर सकता था।
यही तो लेखक होने की पहचान है।
जब तुम कुछ और नहीं कर सकते।
वो पहला शब्द जो तुमने लिखा था
King की माँ ने उनसे कहा था, “Write one of your own, Stevie.”
King ने एक कहानी लिखी। एक जादुई खरगोश के बारे में जो गाड़ी चलाता था। चार पन्ने। पेंसिल से। टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में।
माँ ने पढ़ा। हँस पड़ीं। और बोलीं, “यह किसी किताब में छप सकती है।”
बस।
किसी ने कहा, तुम लिख सकते हो। और उस एक वाक्य ने एक बच्चे के भीतर कुछ जला दिया जो आज तक जल रहा है।
मैं सोचता हूँ, हम सबके जीवन में कोई ऐसा पल होता है। कोई एक पल जब किसी ने हमारी लिखाई को गंभीरता से लिया। या नहीं लिया। और उस “नहीं लिए जाने” ने हमें और ज़िद्दी बना दिया।
दोनों ही तरीकों से हम बनते हैं।
तुम्हें याद है तुम्हारा वो पहला शब्द? वो पहली कहानी? वो पहली कविता जो तुमने किसी को दिखाई थी?
अगर याद है, तो समझो, लेखक तुम पहले से हो। बस अभी पूरे तराशे नहीं गए।
दरवाज़ा बंद करके लिखो
King की किताब में एक छोटी-सी बात है जो मुझे बहुत बड़ी लगती है।
वो कहते हैं, “Write with the door closed.”
पहला ड्राफ्ट सिर्फ तुम्हारे लिए है। किसी को मत दिखाओ। किसी की राय मत लो। किसी की उम्मीद के लिए मत लिखो।
जब मैंने पहली बार लिखना शुरू किया था तो मैं हमेशा डरता था। लिखता था और सोचता था, लोग क्या कहेंगे? यह बहुत अजीब तो नहीं लगेगा? यह बहुत personal तो नहीं है?
और उस डर में मेरी कहानियाँ मर जाती थीं। अधूरी।
फिर मैंने पढ़ा, King जब Carrie लिख रहे थे तो उन्होंने तीन पन्ने लिखकर कूड़ेदान में फेंक दिए। उन्हें लगा, यह नहीं होगा। लड़कियों की दुनिया, locker room, यह मेरे बस का नहीं।
उनकी पत्नी Tabitha ने वो पन्ने कूड़ेदान से निकाले। चिकने किए। पढ़े। और कहा, “यहाँ कुछ है। इसे पूरा करो।”
Carrie से King को पहली बड़ी कामयाबी मिली। Paperback rights के चार लाख डॉलर। वो उपन्यास जो कूड़ेदान में था।
तुम्हारी कितनी कहानियाँ कूड़ेदान में हैं अभी?
पढ़ोगे नहीं तो लिखोगे क्या
King एक बात बहुत सख्ती से कहते हैं।
अगर तुम्हारे पास पढ़ने का वक्त नहीं है तो तुम्हारे पास लिखने के औज़ार नहीं हैं।
यह कठोर है। लेकिन सच है।
मैं जब भी किसी aspiring लेखक से मिलता हूँ तो एक सवाल पूछता हूँ, तुमने पिछले महीने क्या पढ़ा?
अक्सर जवाब में एक लंबी चुप्पी आती है।
पढ़ना लेखक की साँस है। जिस तरह एक संगीतकार दूसरों का संगीत सुनता है, जिस तरह एक चित्रकार galleries में घंटों बिताता है, उसी तरह एक लेखक को पढ़ना पड़ता है। बहुत पढ़ना पड़ता है। अच्छा पढ़ना पड़ता है। बुरा भी पढ़ना पड़ता है, क्योंकि बुरे से भी सीखते हैं।
King साल में सत्तर से अस्सी किताबें पढ़ते हैं।
और वो कहते हैं, यह कोई अलग काम नहीं है। यह लिखने का ही हिस्सा है।
गाड़ी ने कुचला, फिर भी वो लिखने बैठा
1999 में King एक van से टकरा गए। उनके पैर की हड्डियाँ नौ जगहों से टूट गईं। रीढ़ में आठ जगह चोट आई। फेफड़ा बैठ गया।
तीन हफ्ते hospital में रहे।
और पाँच हफ्ते बाद, जब वो अभी भी wheelchair में थे, जब दर्द अभी भी था, जब हर बैठने में तकलीफ थी, वो एक छोटी-सी मेज़ पर बैठे। Tabitha ने पीछे के गलियारे में एक छोटी सी जगह बनाई थी। Laptop रखा। पंखा रखा।
और King लिखने बैठ गए।
पहले दिन पाँच सौ शब्द। बहुत मुश्किल से।
लेकिन लिखे।
वो कहते हैं, “The scariest moment is always just before you start. After that, things can only get better.”
सबसे डरावना पल वो होता है जब तुम शुरू नहीं हुए होते।
एक बार शुरू हो जाओ, बाकी रास्ता खुद बनता है।
लेखक कैसे बनते हैं, सच में
कोई एक दिन नहीं होता जब तुम लेखक बन जाते हो।
कोई एक किताब नहीं होती जो तुम्हें लेखक बना दे। कोई एक course नहीं होता। कोई एक certificate नहीं होता। कोई एक पल नहीं होता जब आसमान से रोशनी उतरे और कहे, बस, अब तुम लेखक हो।
लेखक उन सुबहों में बनते हैं जब नींद पूरी नहीं हुई होती और फिर भी बैठते हैं। उन रातों में बनते हैं जब लगता है कि जो लिखा वो बेकार है और फिर भी नहीं मिटाते। उन rejection slips में बनते हैं जो कील पर टँगती हैं। उन कूड़ेदान की कहानियों में बनते हैं जिन्हें कोई प्यार से उठाकर कहता है, इसे पूरा करो।
King ने एक और बात कही है जो मुझे बहुत गहरी लगती है।
“Writing isn’t about making money, getting famous, getting dates, getting laid, or making friends. In the end, it’s about enriching the lives of those who will read your work, and enriching your own life, as well.”
लिखना तुम्हारी ज़िंदगी को समृद्ध करता है। और उन लोगों की ज़िंदगी को जो तुम्हें पढ़ेंगे।
बस इतना काफी है।
बाकी सब, कामयाबी, पहचान, पैसा, ये सब बाद में आते हैं। या नहीं भी आते। लेकिन यह, यह जो लिखने में है, यह तो है। यह तो हमेशा रहेगा।
तो अगर तुम लेखक बनना चाहते हो तो एक काम करो।
आज लिखो।
कल भी लिखो।
परसों भी।
दरवाज़ा बंद करो। शोर बंद करो। दुनिया की राय बंद करो।
और वो कहानी लिखो जो सिर्फ तुम लिख सकते हो।
क्योंकि लेखक बनाए नहीं जाते।
वो बनते हैं, धीरे-धीरे। एक शब्द, एक वाक्य, एक पन्ना, एक कहानी। एक दिन में एक बार।
बस इतना।
Arahaan

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