टैग: ग़जल
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साँसे फिर चलती नहीं थम जाने के बाद
साँसे फिर चलती नहीं थम जाने के बादहम जीते रहे ज़िन्दगी मर जाने के बाद ऐसा नही था की जीना नही आता था पर भला जी के भी क्या करते उनसे दूर हो जाने के बाद मयखाने में इल्म हुआ की बेहोशी क्या चीज होती हैहमें होश आया मदहोश जाने के बाद वाकिफ ना थे वो की आग…
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आग दिल में लगी रही
आग दिल में लगी रहीसीना ता उम्र जलता रहादूर होता रहा साहिल मुझसे ख्वाब दरिया का दिल में पलता रहाउसको ही बना डाला अपना महबूब दिल नेजिसकी नजरो में मैं हमेशा खलता रहा ख्वाहिश तो थी की कोई थाम ले हाथ जब भी गिरुं ठोकरे खाकर खुद गिरता संभलता रहासजदे में झुका था मैं भी खुदा के आगेमुफलिसी…
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स्याह अँधेरी हैं रातें
स्याह अँधेरी हैं रातेंमिल जाए कहीं आफताब कोई थाम के जिसका हाथ हम आगे बढ़ सकेमिल जाए ऐसा अहबाब कोई एक शब डाल दो झोली में मेरी वस्ल कीपलकों से हम बुन लें ख्वाब कोई मुद्दतें हुयी आँखें उनसे मिली नहींएक पल के लिए उसके चेहरे से हटा दे हिजाब कोई आग ठंडी से पड़ने…
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क्या जरुरी है
क्या जरूरी है की इश्क करें और बेक़रार हो जाएँ चोरी करें और फरार हो जाएँ जुर्म करें और गिरफ्तार हो जाएँ भलाई करें और कुसूरवार हो जाएँ इन्तजार करें और चौकीदार हो जाएँ कहानी लिखें और कहानीकार हो जाएँ दिन काटे सोकर और बेकार हो जाएँ देते रहें मशवरे और सलाहकार हो जाएँ बिक जाएँ सियासत में और पत्रकार हो जाएँ बन जाएँ सनसनीखेज खबर और अखबार हो जाएँ क्या जरुरी है कीहम लड़ें अपने…
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थोड़ी सी जगह दे दो अपनी बाहों में
थोड़ी सी जगह दे दो अपनी बाहों मेंलिपट कर तुमसे रोना है मुझे पा लिया है सबकुछ तुम्हे पाकरअब अपना सब कुछ तुम पर खोना है मुझे टूट गए थे जो सपने तुमसे जुदा होकरतुम्हारे आँखों से उन सपनों को अब संजोना है मुझे रो लेने दो मुझे तुमसे लिपट करआंसुओं से अपने जख्मों को…
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ना फिर इधर उधर जवाब की तलाश में
ना फिर इधर उधर जवाब की तलाश मेंकभी खुद से भी कुछ सवाल कर जररी नहीं हर चीज को दिमाग से तौलनाकभी कभी अपने दिल का भी इस्तेमाल कर चीख चीख कर करता है चैन-ओ-सुकून की बातेपहले अपने दिल में अमन बहाल कर चल कर ले अपना सीना छलनी सच्चाई के तीरों सेऔर झूठ के महलों…
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अच्छा लगेगा
अपने अश्कों में तुमने छिपा रखा है अपना दर्दकभी रो भी लो अच्छा लगेगा तुम वक़्त के हाशिये पर लिखते हो अपनी कहानीकभी वक़्त के साथ चलकर देखो अच्छा लगेगा तुम पूछा करते हो उनसे अपने बारे मेंकभी खुद से करो सवाल, अच्छा लगेगा कितना खोया है तुमने पाने की कोशिश मेंएक दफा बिछड़ों से गले…
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तू समझ या ना समझ
तू समझ या ना समझअब सबकुछ मैं तेरी समझदारी पर छोड़ता हूँदुश्मनों की तादाद बढ़ रही है मेरी दुनियां मेंअब सबकुछ मैं अपना तेरी यारी पर छोड़ता हूँचोट खाया है हमने मजबूत बनने की हर कोशिश परअब सबकुछ मैं अपना, अपनी लाचारी पर छोड़ता हूँमर्ज बढ़ता ही जा रहा है, तीमारदारों की तीमारदारी सेअब सबकुछ…
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कोई था
Photo Courtsey: Tumblr.com कोई था जो हमारी शामें गुलजार किया करता था कोई था जो दरिया किनारे हमारा इंतज़ार किया करता था कोई था जो हम पे अपनी जान भी निसार करता था कोई था जो हम से भी प्यार करता था कोई था जिसके आने से ख़ुशी लौट आती थी कोई था जिसके जाने से आँखें नम हो…