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उसी पुरानी कुर्सी पर: बारिश, चिट्ठी और अनुपस्थिति का शांत स्वागत

मैं आज भी उसी पुरानी कुर्सी पर बैठता हूँ, जिस पर कभी तुम बैठा करती थीं… बारिश की आवाज़ सुनते ही मुझे याद आता है कि तुम भीगने से डरती थीं, फिर भी मेरे साथ बारिश में ठहर जाना तुम्हें अच्छा लगता था। आज जब बारिश आती है, मैं अकेला भीगता हूँ।