टैग: हिंदी कहानी
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उसी पुरानी कुर्सी पर: बारिश, चिट्ठी और अनुपस्थिति का शांत स्वागत

मैं आज भी उसी पुरानी कुर्सी पर बैठता हूँ, जिस पर कभी तुम बैठा करती थीं… बारिश की आवाज़ सुनते ही मुझे याद आता है कि तुम भीगने से डरती थीं, फिर भी मेरे साथ बारिश में ठहर जाना तुम्हें अच्छा लगता था। आज जब बारिश आती है, मैं अकेला भीगता हूँ।
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शब्द कागज़ पर टिक नहीं रहे: बारिश, स्मृतियाँ और एक अधूरी कहानी

बारिश लगातार हो रही है। खिड़की के पार की दुनिया धुंधली पड़ गई है… मैं लिखता हूँ कि कहानी का नायक भीगता हुआ सड़क पार कर रहा है। तभी स्याही की एक बूंद कागज़ पर गिरती है और फैलते-फैलते उसके चेहरे का आकार लेने लगती है। और मैं सोचता हूँ कि शायद असली कहानियाँ वही…
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तुम्हारा दुपट्टा आज भी मेरे पास है | हिंदी शॉर्ट स्टोरी | अधूरी प्रेम कहानी

हमारे घरों के बीच एक छोटी-सी दीवार थी… मैंने दीवार के ऊपर से अपना हाथ बढ़ाया। तुमने अपना दुपट्टा मेरी तरफ कर दिया। फिर एक आवाज़ आई और तुम चली गईं। अब मेरे पास सिर्फ तुम्हारा दुपट्टा है… एक याद जो कभी नहीं मिटती
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हथकड़ी

ये सब एक थॉट, एक सोच से शुरू होता है. दुनिया में तमाम तरह कि कहानियां घट रहीं होती है. कहानियों का काम घटना है. कहानियां नहीं घटेंगी तो इतिहास कहाँ से शुरू होगा. और अगर इतिहास शुरू नही हुआ तो वर्तमान का क्या होगा और वर्तमान ना रहा तो फिर भविष्य कैसे बनेगा. इसलिए…
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उपन्यास: आँखों में मछलियाँ क्यूँ नहीं तैरती

“कहानियों में किसी को गला घोंटकर एक बार में मार देना और किसी को हकीकत में हर पल हर क्षण मुर्दा बनाते रहना. इन दोनों में से कौन ज्यादा भयानक है? अगर तुम्हे उत्तर पता है तो समझ जाओ कि क्या वजह है कि मैं कहानियों में लड़कियों को क्यूँ मार डालता हूँ. कहानियों में…
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उल्टे काग़ज़ की उल्टियाँ
कभी-कभी मुझे लगता है कि मुझे लिखना छोड़ देना चाहिए और ख़ुद को एक हारा हुआ इंसान मानकर मुझे बस अपने सरवाइवल के लिए लड़ना चाहिए। मुझे इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि मैं कितना कमा रहा हूँ। पहले मैं ऐसा नहीं सोचता था, और मेरे ख़याल से शायद कभी किसी को ऐसे सोचना…
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ऊंचाई

खो जाने वाले लोगों का यात्रा संस्मरण। मुझे याद है एक बार मैं अपने एक सपने में एक बाज से कह रहा था कि“मुझे ऊंचाइयों से डर लगता है। एक बार मैं जब बहुत छोटा था तो अपने दोस्तों के बीच हीरो बनने के चक्कर में एक रेडियो टावर पर चढ़ गया था। रेडियो टॉवर…