टैग: कविता
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पर्स
तुम्हारा पर्स हाँ तुम्हारा पर्स चोरी हो चूका है जिसमे थे कुल ३०० रुपये एक रेल टिकट: उस शहर के लिए जहाँ जिन्दा है एक ही शख्स तुम्हारे इंतजार में एक बार का बिल: जहाँ की शराब अब तक तुम्हे मदहोस नहीं कर पाती घर के राशन का लिस्ट: जिसमे पहले नंबर पे है भूख…
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नाश्ता
तुम बड़ी देर से करती हो नाश्ता हमेशा की तरह मुझे दरवाजे तक छोड़ के आने के बाद ही, रखती हो अपने प्लेट में दो बासी रोटी और एक आचार मैं रोज की तरह कुछ देर रुक कर खिड़की से चुपके से देखता हूँ मैं तुम्हे मुस्कुराते हुए सुखी रोटी को निवाला बनाते हुए …
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अश्लील कहानी
अश्लील कहानी कहानी के उस हिस्से में लड़की उतार देती है अपना सबकुछ सिवाए अपने कपड़ो के अपनी इच्छा अपने सपनेअपना आज अपना कल अपनी आत्मा अपनी जिंदगीपरत दर परत खोल देती है वो सबकुछसौंप देती है उसकलमकार कोजिसकी इस कहानी को अश्लील समझकरख़ारिज कर देते है संपादक प्रकाशित करने से अराहान
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तुमसे प्यार करना और वफ़ा की उम्मीद रखना
तुमसे प्यार करना और वफ़ा की उम्मीद रखना ठीक वैसा ही है जैसे पानी की सतह पर लिख देना एक कविता और उम्मीद करना की मछलियाँ इस गाकर सुनाएंगी तुमसे प्यार करना और वफ़ा की उम्मीद रखना ठीक वैसा ही है जैसे आस्तीन में पालना एक सांपऔर उम्मीद करना की वो डसेगा नहीं तुमसे प्यार करनाऔर वफ़ा की उम्मीद रखनाठीक वैसा ही है…
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उम्मीद
बहुत दूर, गहराई में उतर के देखो एक ख्वाबगाह है जहां उम्मीदों के Ghetto में ज़िंदा है मेरी मोहब्बत Below Poverty Line के नीचे अपनी खुरदुरी उँगलियों से Forbes मैगजीन के पन्ने पलटते तुम्हारे जिंदगी की कंपनी में सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन ने के सपने देखते हुए अराहान
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बचा खुचा सामान
बस बचा खुचा हमारे पास एक आसमान है जिसको रोज रात देखकर ये तसल्ली कर लेते हैं की वो वहीँ आसमान है जो तुम्हारे ऊपर है मुट्ठियों में भर लेते है हर रात तुम्हारे शहर से आने वाली हवा वो हवा, जो उतरने से मना कर देती है मेरे फेफड़ों में तुम्हारी तरह ये कहते हुए की “मुझे सिगरेट की गंध से नफरत…
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तुम नहीं समझोगी,
तुम नहीं समझोगी,कितना कठिन होता हैआँखों में शराब भर केकभी ना रोने की कसम खाना पलकों के पांव भारी हो जाते हैंख्वाबों के छूने भर सेसोचो कितना कठिन होता होगाएक आने वाले कल को गड्ढे में गिराना तिलिस्म बुनती रहती है घडीबीते लम्हों के धागों सेबहुत मुश्किल होता हैवक्त से पीछे चले जाना तुम नहीं…
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मेरी मौत के बाद
अगले १० मिनट के अंदर मैं मारा जाऊंगा एक ट्रेन आएगी और रौंद जायेगी मुझे खत्म कर देगी मेरी कहानी मुझे पता है कुछ आँखों से आंसूं बहेंगे मेरे जाने के बाद उतर जायेगा कुछ लोगो के चेहरे का रंग मेरी मौत की खबर सुनकर लग जायेगी एक भीड़ मेरे घर के अहाते में उसी अहाते में जहां से मैं रोज…
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तेरी यादें
आज भी झीने से उतर के चली आती है कमरे में तेरी यादें बिन बुलाये जुगनुओं की तरह अँधेरे में चमकती हुयी उतार देती है दीवारों पे गुजरे जमाने की कुछ धुंधली तस्वीरें कुछ बासी पलों की उखड़ी उखड़ी से लकीरे जिनमे से झांकती है एक गोरी सी लड़की अपनी नम आँखों से मुझे देखती है और हर बार पूछती हैरेलवे की पटरियांअक्सर लोगो जुदा…
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विंडो सीट
मुझे पता हैट्रेन की खिड़की से तुम दिखाई नही दोगीपर हर बार मैं ट्रेन में चुनता हूँ एक विंडो सीट ताकि मैं देख सकूं बाहर पीछे छूटते पेड़ों को इमारतों को जंगलों को हर उस चीज को जो मुझसे छूटती जा रही हैट्रेन के चलने से मुझे महसूस होता है तुम्हारा अक्सउन हर चीजों में जो मुझसे छुट्ती हैबिछड़ती हैये महसूस कराती…