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तुम्हारा दुपट्टा आज भी मेरे पास है | हिंदी शॉर्ट स्टोरी | अधूरी प्रेम कहानी

हमारे घरों के बीच एक छोटी-सी दीवार थी… मैंने दीवार के ऊपर से अपना हाथ बढ़ाया। तुमने अपना दुपट्टा मेरी तरफ कर दिया। फिर एक आवाज़ आई और तुम चली गईं। अब मेरे पास सिर्फ तुम्हारा दुपट्टा है… एक याद जो कभी नहीं मिटती
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चोरी

कुछ ही देर में उसके सामने साड़ियों का ढेर लग गया। एकदम सुंदर सुंदर साड़ियां। उसे यकायक उस दिन की याद आ गयी जब वो पहली बार अपनी बीवी के लिए साड़ियां लेने आया था और एक कि बजाय दुकान से 10 साड़ियां खरीदी थी।