टैग: अराहान
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इंतियाज अली को खत

प्रिय इम्तियाज़ सर, आपको ख़त लिखना, मानो उस रेल की खिड़की से बाहर झाँकना है जहाँ से ज़िंदगी की सबसे हसीन कहानियाँ दिखती हैं। जब पहली बार “सोचा ना था” देखी तो लगा जैसे कोई दोस्त मिल गया हो, जो बिना किसी फ़िल्टर के अपनी कहानी कह रहा हो। आपकी हर फ़िल्म में वो सच्चाई…
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हथकड़ी

ये सब एक थॉट, एक सोच से शुरू होता है. दुनिया में तमाम तरह कि कहानियां घट रहीं होती है. कहानियों का काम घटना है. कहानियां नहीं घटेंगी तो इतिहास कहाँ से शुरू होगा. और अगर इतिहास शुरू नही हुआ तो वर्तमान का क्या होगा और वर्तमान ना रहा तो फिर भविष्य कैसे बनेगा. इसलिए…
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उपन्यास: आँखों में मछलियाँ क्यूँ नहीं तैरती

“कहानियों में किसी को गला घोंटकर एक बार में मार देना और किसी को हकीकत में हर पल हर क्षण मुर्दा बनाते रहना. इन दोनों में से कौन ज्यादा भयानक है? अगर तुम्हे उत्तर पता है तो समझ जाओ कि क्या वजह है कि मैं कहानियों में लड़कियों को क्यूँ मार डालता हूँ. कहानियों में…
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मछली

“हम सब पानी में गुम हैं?”“नहीं, पानी हम सब में गुम है।”“हम दोनों मछली हैं क्या”?“हां”।“पानी तो हममें गुम है! हमें हम में जाना होगा क्या या मर जाना होगा क्या?”“अब हम मछली से मेढ़क हो गए। हम नहीं मरेंगे”। “तिकोने आसमान से तुमने क्या मांगा?”“समोसे। टेढ़े आसमान से तुमने क्या मांगा?“जलेबी।”“तुम अचानक से बचपन…
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“रोहित अग्रवाल (12C), निहारिका कक्कर (11A) की लेता है”

“रोहित अग्रवाल (12C), निहारिका कक्कर (11A) की लेता है”स्कूल के टॉयलेट के दीवारों पर परमानेंट मार्कर की सहायता से बेरहमी से उकेरे गए ये शब्द मेरे जीवन के सबसे घिनौने, डरावने और खतरनाक शब्दों में से एक थे. उस दिन मैं क्लास में बहुत शांत रहा. रोज की तरह आज मैंने अकाउंट्स के टीचर की…
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घर वापसी

वो गली जिसे भुतहा समझकर लोगो ने अनदेखा कर दिया है कभी उस गली में जाना, वहाँ 11वी क्लास एक लड़का जस का तस बैठा मिलेगा क्लास की पिछली बेंच पर एक लड़की को टुकुर टुकुर ताकते हुए, मुट्ठियों में कागज़ के टुकड़े को भींचे हुए। उस लड़की की शकल तुमसे कितनी मिलती है ये…
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खामोशियाँ

प्रेम किसी भाषा किसी शब्द का मोहताज नहीं होता।खामोशियाँ भी कभी कभी इतना कुछ कह जाती है जो शायद जुबान से बोलकर भी नहीं कही जा सकती। कुछ ऐसी हीं कहानी उनदोनो की भी थी।उन दोनों को भली भाँती पता था की उनके दिल में क्या है पर एक अनजाने से डर के कारण वे…
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गलत ट्रेन

ट्रेनें हमेशा दो जगह ही पहुंचाती है। सही जगह या गलत जगह। वो अक्सर सही ट्रेन ही पकड़ा करता था और सही वक्त पर सही जगह पहुंच जाता था। सही जगह पर हमेशा एक मेज होती थी और मेज के ड्रावर में ढेर सारी गलतियां। सही जगह पहुंचने पर वो जेब से गलतियां निकालता और…
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च्युइंगगम

च्युइंग ग्मस के बारे में सर्च करने पर हमें गूगल पर कई सारी जानकरियाँ कई सारे क्वोत्स मिल सकते हैं। चूइंग ग़म के व्यापारिक और वैज्ञानिक पहलुओं को अनदेखा करते हुए इसे अगर साहित्यिक विचारधारा से जोड़ कर देखने पर हम इसके बारे में सबसे प्रचलित बात ये कह सकते हैं की बीवियाँ/प्रेमिकाएँ चूइंग ग़म…
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जीभमिथ्या-जीवहत्या

कल्पना कीजिये कि आप एक समानान्तर विश्व में हैं। इस विश्व में सभी चीजें वैसी ही हैं जैसे आपके वर्तमान विश्व में है। रविवार का दिन है। आप बाज़ार गए थे और वहां से 1 किलो चिकन खरीदा था। आपने चिकन धोया। इसको ऐसे समझकर देखिये कि आपने किसी एक जीव की लाश को खाने…