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तुम्हारा दुपट्टा आज भी मेरे पास है | हिंदी शॉर्ट स्टोरी | अधूरी प्रेम कहानी

हमारे घरों के बीच एक छोटी-सी दीवार थी… मैंने दीवार के ऊपर से अपना हाथ बढ़ाया। तुमने अपना दुपट्टा मेरी तरफ कर दिया। फिर एक आवाज़ आई और तुम चली गईं। अब मेरे पास सिर्फ तुम्हारा दुपट्टा है… एक याद जो कभी नहीं मिटती
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लेखक बनते है धीरे धीरे

मुझे याद है वो रात जब मैंने पहली बार कुछ लिखा था और सोचा था कि शायद यही है। शायद यही वो चीज़ है जो मुझे करनी है। लिखा क्या था? कुछ खास नहीं। कुछ लाइनें थीं, थोड़ी टेढ़ी-मेढ़ी, थोड़ी कच्ची। लेकिन उन्हें लिखते वक्त जो महसूस हुआ था, वो एक अजीब-सी राहत थी। जैसे…
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पेन होल्डर की स्मृति

एक पेन होल्डर की स्मृति में क्या-क्या हो सकता है? पेन के निशान, स्याही के दाग, धूल के महीन सुनहरे कण, अँगुलियों का स्पर्श? कायदे से एक पेन होल्डर की स्मृति में बस इतनी ही चीजें होनी चाहिए. इस से ज्यादा स्मृतियाँ पेन होल्डर को इंसान बना सकती हैं. शायद यही वजह है की पेन…
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White Flowers: A Story By Arahaan

The rain falls like tears from a sky that has forgotten how to stop crying.Each drop carries within it the weight of unfinished stories, of lives that ended before their sentences were complete. I sit at my desk, a cup of coffee growing cold beside me, Murakami’s book lying open to a page I have…
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एक जैज़ क्लब, बीयर और बेसबॉल: मुराकामी के लेखक बनने की अनसुनी कहानी

कुछ समय पहले मैंने What I Talk About When I Talk About Running’ किताब में हारुकी मुराकामी के लेखक बनने की कहानी पढ़ी थी। चूँकि मैं खुद लिखता हूँ और आगे जाकर एक लेखक बनना चाहता हूँ इसलिए मैं इस किताब को पढ़कर और मुराकामी के लेखक बनने की यात्रा को जानकार काफी प्रेरित हुआ।…
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इंतियाज अली को खत

प्रिय इम्तियाज़ सर, आपको ख़त लिखना, मानो उस रेल की खिड़की से बाहर झाँकना है जहाँ से ज़िंदगी की सबसे हसीन कहानियाँ दिखती हैं। जब पहली बार “सोचा ना था” देखी तो लगा जैसे कोई दोस्त मिल गया हो, जो बिना किसी फ़िल्टर के अपनी कहानी कह रहा हो। आपकी हर फ़िल्म में वो सच्चाई…
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लाल कबूतर: यूट्यूब पर उपलब्ध एक बेहतरीन पाकिस्तानी फ़िल्म

Best Pakistani Movie: बात जब पाकिस्तानी फ़िल्मों की आती है तब हमारे ज़ेहन में गिने-चुने नाम ही आटे हैं जैसे ‘बोल’, ‘रामचन्द पाकिस्तानी’, ‘खुदा के लिए’, ‘वार’, ‘मौला जट’ या ‘मैं शाहिद अफरीदी’। अगर कोई ज्यादा ही फ़िल्मों का शौकीन हो तो वो शायद कुछ और मसाला फ़िल्मों के नाम बता दे जैसे ‘ना मालूम अफ़राद’, ‘जवानी फिर नहीं आनी’ या फिर अली ज़फ़र की ‘तीफ़ा इन…
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देर रात सात मई को यह लिखा मैंने
मैं इंतजार की दास्ताँ क्या सुनाऊँ बातों मे एक दोपहरी ठहर के बीत गयी काली बेचैन रातों में जैसे चीखों के बाग में खामोशी के फूल खिले हुए बहुत कहना चाहते हैं मेरे ये लब मुहब्बत के धागों से सिले हुए दिल को बड़ा सुकूँ आया है तुम्हारे बगीचे में आम देखकरइस बार तोड़े जाने…
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Book Review: The Premonition by Banana Yoshimoto In Hindi
The Premonition by Banana Yoshimoto In Hindi: आज से एक दशक पहले मुझे एक लेखक का नाम मालूम हुआ था “हरुकी मुराकामी”. इनकी मैंने दो तीन उपन्यास पढ़े, कुछ कहानी संग्रह भी. इन किताबों को पढने के बाद मुझे अचानक से जापानी साहित्य से एक अलग तरह का लगाव हो गया है. मैंने इसके बाद…
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Film Review August 16 1947 | फिल्म समीक्षा अगस्त 16 1947

आज मैं जिस फिल्म के बारे में बात करने जा रहा हूँ उसपर विस्तार से बात करने से पहले मैं बस एक बात आप सबसे साझा कर रहा कि हमलोग कितने खुशनसीब हैं कि जब हमने पहली बार आँखें खोली थी तब हम आज़ाद हिन्दोस्तां में थे, उस जमीन पर थे जहाँ यूनियन जैक कि…